पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले; हिजबुल्ला पर लगे आरोप

पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले; हिजबुल्ला पर लगे आरोप
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के साथ इस्राइल और लेबनान में भी हलचल देखी जा रही है। ताजा घटनाक्रम में ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इस्तीफे का एलान कर दिया है। हालांकि, तेहरान में ईरान की सरकारी मीडिया की तरफ से जारी बयान में इस्तीफे का खंडन किया गया है। पश्चिम एशिया में जारी टकराव पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में ईरान में प्रदर्शन किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। राजधानी तेहरान में बड़ी संख्या में आक्रोशित लोगों को सड़कों पर उतरे देखा गया। अमेरिका के खिलाफ हो रहे इस प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के घायल होने की भी खबर है।
मार्को रूबियो का आरोप- इस्राइल के साथ सीजफायर प्रयासों को कमजोर कर रहा हिजबुल्ला
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि हिजबुल्ला, इस्राइल के साथ युद्धविराम की कोशिशों को कमजोर कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह समूह हमले रोकने से इनकार कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल ही में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की। यह बातचीत इस्राइल और लेबनान के बीच चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा थी।
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ‘इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने एक साफ योजना दी। जिसके तहत पहले हिजबुल्ला को इस्राइल पर सभी हमले रोकने होंगे। इसके बदले में इस्राइल भी बेरूत में किसी तरह की और सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। इससे धीरे-धीरे तनाव कम करने और लड़ाई खत्म करने का रास्ता बनेगा।’
अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति जोसेफ आउन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाना चाहते थे और सभी पक्षों के बीच सहमति बनवाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन यह कोशिश लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी के जवाब के बाद रुक गई। नबीह हिजबुल्ला के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। अधिकारी के अनुसार, बेरी ने कहा कि वे हिजबुल्ला की तरफ से सीजफायर का भरोसा दिला सकते हैं, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि पहले इस्राइल को सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी।
होर्मुज में अमेरिकी सेना ने 118 व्यापारिक जहाज खदेड़े
पश्चिम एशिया के समंदर में तनाव बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों को पूरी तरह घेर लिया है। अमेरिकी सैन्य कमान (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। अमेरिकी सेना ने ईरान जाने और वहां से आने वाले 118 व्यापारिक जहाजों का रास्ता बदल दिया है। यही नहीं, अमेरिकी सेना की बात न मानने वाले पांच जहाजों को पूरी तरह अपाहिज यानी निष्क्रिय कर दिया गया है। अमेरिका ने ईरान की यह नौसैनिक नाकेबंदी 13 अप्रैल को शुरू की थी। अमेरिकी सेना ने साफ चेतावनी दी है। वे ईरान के बंदरगाहों की तरफ आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोकते रहेंगे। हैरत की बात यह है कि कार्रवाई तब हो रही है जब दोनों देश शांति की राह पर आने के लिए बातचीत भी कर रहे हैं।



