छत्तीसगढ़

जब पैरों ने जलाया उम्मीद का दीप

हाथों ने साथ छोड़ा तो हौसलों ने थाम ली रोशनी, रुद्रेश्वर घाट पर वर्षा ने पैरों से प्रज्वलित किया दीप

जब पैरों ने जलाया उम्मीद का दीप

 

हाथों ने साथ छोड़ा तो हौसलों ने थाम ली रोशनी, रुद्रेश्वर घाट पर वर्षा ने पैरों से प्रज्वलित किया दीप

 

धमतरी – रुद्रेश्वर घाट पर गुरुवार शाम एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के शुभारंभ के दौरान दिव्यांग छात्रा वर्षा ध्रुव ने अपने पैरों से दीप प्रज्वलित कर उम्मीद, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश की।

 

ग्राम सियादेही निवासी वर्षा ध्रुव कक्षा 11वीं में कला संकाय की छात्रा हैं और वर्तमान में रुद्री स्थित एडजेस्ट फाउंडेशन में रहकर अध्ययन कर रही हैं। उनके पिता नरेंद्र कुमार ध्रुव और माता हीरू बाई खेती-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वर्षा ने शिक्षा जारी रखने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का संकल्प नहीं छोड़ा है।

 

योजनाओं से परिवार को मिला सहारा

 

वर्षा के परिवार को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उनकी माता के नाम गरीबी रेखा का राशन कार्ड है, जिसके माध्यम से परिवार को प्रतिमाह 35 किलो चावल मिलता है। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत उनकी माता को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है।

 

वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को पक्का मकान भी मिला। इसके अलावा वर्षा को छात्रवृत्ति तथा समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। इन योजनाओं से परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को कम करने के साथ ही वर्षा की शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी मदद मिली है।

 

पैरों से जलाया दीप, दिया हौसले का संदेश

 

रुद्रेश्वर घाट पर जब वर्षा ने अपने पैरों से दीप प्रज्वलित किया तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह महज एक दीप जलाने का क्षण नहीं था। यह विपरीत परिस्थितियों के बीच हिम्मत और आत्मविश्वास की जीवंत तस्वीर बन गया।

 

वर्षा ने बताया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से उनके परिवार को आवास, राशन, आर्थिक सहायता और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग मिला है। इन्हीं योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करने और ‘सेवा संकल्प अभियान’ में सहभागिता के लिए वह रुद्रेश्वर घाट पहुंची थीं।

 

दीप की लौ से घाट रोशन हुआ, लेकिन वर्षा के हौसलों ने वहां मौजूद लोगों के मन में उम्मीद की एक अलग रोशनी जगा दी।

 

वर्षा ने पैरों से सिर्फ दीप नहीं जलाया, बल्कि यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और हौसलों की रोशनी से अंधेरे को उजाले में बदला जा सकता है।

 

 

Author Desk

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