जब टेस्टिंग हो रही थी, फिर शिविर क्यों? नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

धमतरी(प्रखर) स्वास्थ्य विभाग के मितानिन द्वारा मानसून से पहले और बाद में जल परीक्षण करना नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होता है, लेकिन इस बार नियमों को ताक पर रख दिया गया। न तो मानसून पूर्व जल परीक्षण किया गया, न ही बाद में। जब उपनेता प्रतिपक्ष विशु देवांगन ने इस मुद्दे पर आयुक्त को पत्र लिखकर कड़ा सवाल उठाया, तब जाकर हरकत में आई नगर सरकार और आनन-फानन में शिविर आयोजन का आदेश जारी कर दिया गया।
इधर जल विभाग के सभापति अपने बचाव में ज़ोर-शोर से बयान दे रहे हैं कि जल परीक्षण कराया जा रहा है। लेकिन यदि वास्तव में परीक्षण हो रहा था, तो फिर उप नेता प्रतिपक्ष विशु देवांगन के पत्र के बाद ही शिविर क्यों लगा? इसका सीधा अर्थ है कि या तो कार्य समय पर नहीं किया गया, या फिर दिखावे के लिए अब किया जा रहा है।
कांग्रेस महिला पार्षद सुमन मेश्राम,उमा ध्रुव,पूर्णिमा रजक, रामेश्वरी कोसरे ने तंज कसते हुए कहा जब उप नेता प्रतिपक्ष ने पत्र लिखा तो तत्काल आदेश निकाला गया। यदि पहले ही कार्य हो रहा था, तो जल विभाग के सभापति को सफाई देने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। पहले जवाबदारी समझनी चाहिए, फिर प्रचार की बात करें।
अब सवाल ये उठता है — जब पहले से जल सैंपल टेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, तो फिर इस शिविर आयोजन की आवश्यकता क्यों पड़ी? कहीं ऐसा तो नहीं कि नगर निगम और जल विभाग के बीच तालमेल की भारी कमी है, जो जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इतने गंभीर विषय को भी राजनीति का अखाड़ा बना रही है?
कांग्रेसी पार्षदों ने इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन को घेरते हुए कहा कि पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता पर लापरवाही जनता के साथ अन्याय है। यदि मानसून के दौरान दूषित पानी से कोई जन स्वास्थ्य संकट खड़ा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर ये शिविर वास्तविक ज़रूरत का परिणाम है या फिर सवालों से घबरा कर दिखाई जा रही हड़बड़ी का नतीजा?



