देश की रक्षा तो बहुत दूर की बात है, आप पहले अपना घर बचा लीजिए : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में शुक्रवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि विदेशों में भी अब लोग रिवर्स मोड पर जा रहे हैं। वहां पर भी अब सोबर कपड़े पहनने का ट्रेंड शुरू हो चुका है। आज हम अपने देश को बचाना चाहते हैं पर वह तो बहुत दूर की बात है, पहले आप अपने घर को ही बचा लीजिए। आप जब खुद में परिवर्तन लाओगे तभी आप परिवार में परिवर्तन ला सकोगे और समाज को परिवर्तित कर सकोगे।
साध्वीजी कहती है कि आप धर्म स्थान में पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पूजा अर्चना करेंगे तो देखना आपको अलग ही अनुभूति मिलेगी। घर पर भी सास अगर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर रहती है तो उसका फर्क घर में दिखता है और बच्चे भी उनका अनुसरण करते हैं। उटपटांग कपड़े पहनोगे तो घर के लोग भी आपको पसंद नहीं करेंगे। बाहर में भी आपका आदर सम्मान नहीं होगा और लोग आपको अलग नजरों से देखेंगे। अगर आपको कहा जाए कि आज साड़ी पहनना है तो आप बोलते हो कि टाइम लगेगा और साड़ी पहनना बहुत ही कंझट काम है। धर्म स्थान जाने के लिए आप समय का हिसाब किताब रखते हो और किसी पार्टी में रात 12 बज जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता। जबकि धर्म स्थान पर आपको कपड़े पहनने में समय लगता है पर पिकनिक और पार्टी में जाते समय नहीं। आपने कभी किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि को देखा होगा तो उनकी वेशभूषा भी आपने देखी होगी। वे बहुत ही सोबर कपड़े पहनते हैं।
सभी ने लिया संकल्प : बच्चों को नहीं खरीदने देंगे अमर्यादित कपड़े
साध्वीजी ने आगे कहा कि जिनके आशीर्वाद से हमारा कल्याण हो सकता है, वहां पर भी आप नाइट ड्रेस, लोअर, बरमूडा पहनकर दर्शन करने जाते हो। पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आप जब घर से बाहर निकलते हो तो उस दिन आपके मन में शांति रहती है, इसकी अनुभूति आपने की होगी। जबकि उटपटांग कपड़े पहन कर आप निकलते हो तो उस दिन की अनुभूति आप खुद ही कर सकते हो। पुराने समय में जब कोई फटे कपड़े पहनता था क्यों उसे यह समझा जाता था कि इसके पास और कपड़े नहीं है और मजबूर होकर उसे फटे कपड़े पहनने पढ़ रहे हैं। जबकि आज विपरीत स्थिति है, फटे कपड़े महंगे मिलते हैं और सोबर कपड़े सस्ते। आज सभी माता-पिता संकल्प लें की बच्चों को आप अमर्यादित कपड़े पहनने नहीं देंगे और ना ही ऐसे कपड़े खरीदने देंगे।
साध्वीजी ने कहा कि आज आपके घर में गैस खत्म हो जाए तो आप इंडक्शन का उपयोग करते हैं और जब लाइट गोल हो जाए तो इंडक्शन भी काम नहीं करेगा फिर आप इनवर्टर के भरोसे रहेंगे। इंधन के अभाव में कभी आपका जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए। वैसे ही भोजन के अभाव में शरीर अव्यवस्थित हो जाता है। आपको अपने आहार पर ध्यान देना है। आज से 30 साल पहले तक अनाज, फल, सब्जी का स्वाद अलग ही था, आज सब रसायनिक हो चुका है। आप सुबह 10-11 बजे उठोगे तो खाने के टाइम पर आप नाश्ता करोगे और शाम के नाश्ते के टाइम पर खाना खाओगे। तो सोचो आपके शरीर की स्थिति क्या होगी। पहले तो चाय भी नहीं होती थी, लोग दूध और उसके उत्पाद को सुबह नाश्ते में खाते पीते थे। लेकिन क्या करोगे जिसकी मनाही होती है, शौक भी उसी के होते हैं। तो आपको अपना जीवन व्यवस्थित रखना है। जो व्यवस्थित जीवन जीता है, वह सदा निरोगी रहता है।



