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27 राज्यों के वैद्य एक मंच पर जुटे, जड़ी-बूटियों से असाध्य रोगों के उपचार पर हुआ मंथन

अखिल भारतीय परंपरागत वैद्य महासंघ का दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर संपन्न, धमतरी के प्रेमचंद देवदास बने जिलाध्यक्ष

27 राज्यों के वैद्य एक मंच पर जुटे, जड़ी-बूटियों से असाध्य रोगों के उपचार पर हुआ मंथन

अखिल भारतीय परंपरागत वैद्य महासंघ का दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर संपन्न, धमतरी के प्रेमचंद देवदास बने जिलाध्यक्ष

धमतरी(प्रखर)भारत की प्राचीन आयुर्वेद एवं वनौषधि परंपरा को सशक्त बनाने और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से अखिल भारतीय परंपरागत (वैद्य) वनौषधि प्रशिक्षित वैद्य महासंघ, छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में 15 एवं 16 जुलाई को दुर्ग जिले के उतई स्थित मंगल भवन में दो दिवसीय राष्ट्रीय वैद्य शिविर एवं संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय शिविर में देश के 27 राज्यों से आए पारंपरिक वैद्यों, वनौषधि विशेषज्ञों एवं आयुर्वेदाचार्यों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए तथा औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के माध्यम से विभिन्न बीमारियों के उपचार पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग सांसद विजय बघेल तथा छत्तीसगढ़ राज्य पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम रहे। उन्होंने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण, शोध और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद और वनौषधियों की उपयोगिता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और इसे वैज्ञानिक आधार के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

शिविर के प्रथम दिवस आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अनुभवी वैद्यों एवं विशेषज्ञों ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय वनौषधियों में अनेक गंभीर रोगों के उपचार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। संगोष्ठी में हार्ट संबंधी समस्याएं, साइटिका, गठिया, मधुमेह, थायराइड, गुर्दे की बीमारियां, त्वचा रोग सहित कई जटिल रोगों के उपचार में उपयोग होने वाली विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों और उनके पारंपरिक प्रयोगों की जानकारी दी गई। साथ ही आयुर्वेदिक चिकित्सा के वैज्ञानिक अध्ययन, अनुसंधान और जन-जन तक इसके लाभ पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए वैद्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उपयोग की जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों, औषधीय पौधों एवं पारंपरिक औषधियों की प्रदर्शनी भी लगाई। इस प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने औषधीय पौधों और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की। वैद्यों ने एक-दूसरे के साथ अनुभव साझा करते हुए नई वनौषधियों एवं उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम में महासंघ के संगठनात्मक विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अखिल भारतीय परंपरागत (वैद्य) वनौषधि प्रशिक्षित वैद्य महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल कुमार भृगु, राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र डेकाडे तथा वीरेन्द्र देशमुख को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। वहीं धमतरी के वरिष्ठ वैद्य प्रेमचंद देवदास को महासंघ का धमतरी जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति पर उपस्थित वैद्यों एवं पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

शिविर के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की प्राचीन आयुर्वेद एवं वनौषधि परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए पारंपरिक वैद्यों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण, औषधीय पौधों का संरक्षण तथा जन-जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि प्राकृतिक चिकित्सा की इस अमूल्य विरासत का लाभ समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

Author Desk

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