संसद में गतिरोध के बीच सरकार ने पास कराया एमएसएमई विधेयक, सदन 10 अगस्त तक स्थगित

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का 15वां दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार, 10 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र के तीन सप्ताह बीतने के बावजूद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव खत्म नहीं हो सका है। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। हालांकि, इस बीच सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की। लोकसभा ने शुक्रवार को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के बाद उन्हें पारित कर दिया।
भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
कार्यवाही स्थगित होने से पहले राज्यसभा के सभापति ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन भारत की आजादी की लड़ाई का ऐतिहासिक पड़ाव था, जिसने देशवासियों में स्वतंत्रता, एकता और राष्ट्रसेवा की भावना को नई ऊर्जा दी। सभापति ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन का संदेश आज भी देश की नई पीढिय़ों को देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय एकता के आदर्शों के प्रति प्रेरित करता है। लगातार जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजरें 10 अगस्त को होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने पर लंबित विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन
संसद के मकर द्वार पर शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर चंदा मामले में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरा।
लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव, पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्राओं के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के आरोप गंभीर हैं और इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में विस्तृत बयान देना चाहिए। अपने नोटिस में टैगोर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन हटाने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस, वाटर कैनन और कथित तौर पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया, क्या यह कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप थी, तथा इस कार्रवाई में कितने छात्र घायल हुए, हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए।
एफसीआरए संशोधन विधेयक का कांग्रेस करेगी जोरदार विरोध : वेणुगोपाल
कांग्रेस महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने प्रस्तावित एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जब संसद की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है, तब सरकार इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पारित नहीं करा सकती। वेणुगोपाल ने कहा, हमने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। एफसीआरए बिल का जोरदार विरोध करेंगे। यह ऐसा कानून है, जिसका प्रभाव लाखों लोगों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ेगा। सरकार इसे जबरन पारित नहीं करा सकती और हम ऐसा होने नहीं देंगे।
इस दौरान उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस कार्यक्रम में की गई टिप्पणी का भी जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने कहा कि यदि आरएसएस युवा पीढ़ी और छात्रों के प्रति वास्तव में गंभीर है, तो उसे छात्रों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से संसद में छात्रों के मुद्दे पर जवाब देने और माफी मांगने की भी मांग की। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी छात्रों की जायज मांगों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि जहां भी छात्र अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे, कांग्रेस उनका समर्थन करती रहेगी।



