भारत ने दुनिया को सस्ती दवाएं और प्रतिभाशाली युवा दिए, बदले में क्रेडिट-रॉयल्टी नहीं मांगी : पीएम मोदी

भारत पहली बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का बना मेजबान
पीएम मोदी का विकास का नया मंत्र: तकनीक और ताकत का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक, डेटा और इनोवेशन की बढ़ती ताकत के बीच विकास का नया नजरिया पेश करते हुए कहा कि आज असली सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। तकनीक, ज्ञान और संसाधनों का लाभ यदि कुछ लोगों तक सीमित रह जाता है, तो उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होता। इनका इस्तेमाल आम लोगों को सशक्त बनाने, उनकी क्षमताएं बढ़ाने और समाज के व्यापक वर्ग तक अवसर पहुंचाने के लिए होना चाहिए। भारत में पहली बार आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने समावेशी विकास, लोकतंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भारत का दृष्टिकोण रखा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी आर्थिक, तकनीकी और वैज्ञानिक क्षमताओं का उपयोग पूरी मानवता के कल्याण और दूसरे देशों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए करना चाहता है। उन्होंने कोविड के दौरान 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति, पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने, 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि और 700 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सस्ते मोबाइल डेटा, स्टार्टअप और डिजिटल सुविधाओं ने छोटे शहरों के युवाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। भारत लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनसशक्तीकरण में विश्वास रखता है, जबकि बदलते वैश्विक परिदृश्य में एआई, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदारों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार के पास अधिकार और संसाधन होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़ों में सुधार करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना भी है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें नागरिकों को आगे बढऩे और अपनी क्षमताओं का उपयोग करने के अधिक अवसर मिलें।
भारत लोकतंत्र की जननी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर
प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग भाषाओं, विचारों और दृष्टिकोणों को जगह मिलती है। उन्होंने बताया कि भारत में 100 से अधिक भाषाएं, करीब 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्र एवं प्रकाशन और एक हजार से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। इसके अलावा, उन्होंने 50 करोड़ से अधिक यूट्यूब और 50 करोड़ से अधिक इंस्टाग्राम उपयोगकर्ताओं का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बहस होती है और डिजिटल तकनीक ने लोगों के संवाद तथा विचारों के आदान-प्रदान को और व्यापक बनाया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ मानवता के साथ पशुओं तक पहुंचाने की सोच
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तकनीक का उपयोग मानवता के हित में किया जाना चाहिए। भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें तकनीक के व्यापक सामाजिक उपयोग और मानव कल्याण के साथ पशुओं को होने वाले संभावित लाभों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत की क्षमताएं बढऩे के साथ उनका लाभ केवल देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को मिल सकता है। तकनीक का वास्तविक महत्व तभी है, जब वह समाज के व्यापक वर्ग के जीवन को बेहतर बनाए।
जलवायु लक्ष्य तय समय से पहले हासिल करने का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत 2030 तक अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था। उनके अनुसार, भारत ने नवंबर 2021 में ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया। प्रधानमंत्री ने इसे जलवायु संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में किए गए प्रयासों का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
ज्ञान, धन और शक्ति का सही इस्तेमाल ही असली कसौटी
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति, संस्था या देश के पास ज्ञान, धन और शक्ति होना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाता है। भारत की प्राचीन परंपराओं में भी संसाधनों और सामर्थ्य के उपयोग को जनकल्याण से जोडक़र देखा गया है। उन्होंने कहा कि शासन और विकास की नीतियों में इस सोच को अपनाते हुए लोगों को अधिक अवसर देना और उनकी क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है।
पहली बार भारत में आयोजित हुआ ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम
प्रधानमंत्री ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के भारत में पहली बार आयोजित होने पर आयोजकों और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मंच दुनिया के प्रमुख विचारकों और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री के संबोधन में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और नवाचार की भूमिका तभी सार्थक होगी, जब उनका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे और विकास का रास्ता अधिक समावेशी बने।



