छत्तीसगढ़

मंदिर जाने के लिए स्नान आवश्यक नहीं, केवल आपका मन शुद्ध होना चाहिए : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। आपको हर दिन मंदिर जाना चाहिए, अगर रोज नहीं जा सकते तो पर्व के दिन, अपने जन्मदिन के दिन, अनुष्ठान और संस्कारों के अवसर पर जरूर जाना चाहिए। लोग आजकल यह बोलते है कि नहाने में देरी हो गई या आज नहाया नहीं है इसलिए मंदिर नहीं गए। मंदिर जाने के लिए स्नान करने की जरूरत नहीं है। अगर आपको केवल भगवान के दर्शन करने हो तो नहाने की आवश्यकता नहीं, आपको तन नहीं अपने मन को शुद्ध बनाए रखना है। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही।

साध्वीजी कहती है कि स्नान करने की आवश्यकता तब है जब आपको भगवान की पूजा-अनुष्ठान करनी हो। स्नान केवल आपके शरीर स्वच्छ और सुंदर बनाता है परतुं आपके मन के भाव आपको असल मायने में शुद्ध बनाते है। केवल चार लोटे जल से आप स्नान कर शुद्ध हो सकते हो। आज आपने घर में शॉवर लगा रखा है, जहां जगह ज्यादा होती है वहां बाथटब और अतिरिक्त जगह होने पर आप अपने घरों में स्वीमिंग पूल बनवाते हो, जबकि आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। यह सारी बातें शास्त्रों में लिखी हुई हैं लेकिन आपके पास उन्हें पढ़ने का समय नहीं है। जबकि आप अपने दिनचर्या के बच हुए समय का उपयोग मोबाइल और सोशल मीडिया चलाने पर व्यर्थ कर देते हो। आजकल लोग नदी, तालाबों में नहाने जाते है, समुद्र में भी लोग मजा करने उतर जाते है। प्रतिमा विसर्जन के समय भी लोग नदी-तालाबों में उतर जाते है और अखबारों में यह खबर पढ़ने मिलती है कि कोई नदी में बह गया तो किसी की तालाब में डूब कर मृत्यु हो गई।

साध्वीजी कहती हैं कि कुछ लोगों को तो पानी के प्रति इतना लगाव होता है कि वे दिन में चार से पांच बार नहाते है। आपको पानी के प्रति इतनी आसक्ति नहीं होनी चाहिए। अगर आप पानी के प्रति आसक्ति रखेंगे तो अगले भव में आपको पानी के जीव की योनि मिल जाएगी। आजकल तो लोगों ने ठंड के दिनों में नहाने के लिए गिजर की व्यवस्था कर रखी है। शायद आपको न पता हो पर यह गिजर न जाने पानी के कितने जीवों की जान ले लेता है। वैसे ही आपको ठंडे पानी में गर्म पानी भी नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि इससे भी जीव हत्या होती है। आपको कुंए के पानी से स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे कपड़े पहनकर पूजा-पाठ करनी चाहिए। भगवान का अभिषेक भी आपको कुंए के पानी से करना चाहिए। आज तो आपने पूजा-अनुष्ठान का सारा ठेका पुजारी को दे रखा है। चंदन भी घसे, पानी भी वही लाए और पूजा-पाठ की सारी तैयारियां भी वही करे, आप बस जाइए, बैठिये और अनुष्ठान कर के घर वापस आ जाइए। आपको अपने विवेक से भगवान की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। बिना विवेक से की गई पूजा-अर्चना का कोई परिणाम नहीं निकलता है।

मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।

Author Desk

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