हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन का निधन, 98 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

रायपुर। भारत में हरित क्रांति के जनक वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का 98 साल की उम्र में निधन हो गया। स्वामीनाथन को अपनी खोज के लिए भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में जना जाता था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और हरितक्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने डॉ. स्वामीनाथन के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि डॉ. स्वामीनाथन ने देश में हरितक्रांति लाकर कृषि की तस्वीर बदल दी। कृषि के क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और अनेक उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें पदमश्री और पदमविभूषण सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी सम्मानित गया था। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने गेंहू और चावल की ऐसी किस्में विकसित की थी, जिससे फसल की पैदावार बढ़ी। डॉ. स्वामीनाथन हमेशा किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए उचित समर्थन मूल्य के पैरोकार रहें। डॉ. स्वामीनाथन के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए फसल की उचित कीमत दिलाने की व्यवस्था की गई।
एमएस स्वामीनाथन को 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया जा चुका था। भारत को हरित क्रांति की सौगात देने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का 98 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया। कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन को ‘फादर ऑफ ग्रीन रेवोल्यूशन इन इंडिया’ यानी ‘हरित क्रांति के पिता’ भी कहा जाता है। 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुम्भकोणम में जन्मे एम. एस. स्वामीनाथन पौधों के जेनेटिक वैज्ञानिक थे। उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए थे। स्वामीनाथन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश के इतिहास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय में कृषि में उनके अभूतपूर्व कार्य ने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया और हमारे देश के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की।



