उरला की थ्रीडी फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट : मंत्री लखनलाल बोले मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख का मुआवजा

रायपुर। उरला स्थित फैक्ट्री में ब्लास्ट की घटना को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हादसे के बाद कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को बंद कर दिया गया है। मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगे भी उद्योगों में सुरक्षा पर कड़ाई से काम किया जाएगा। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने घटना को लेकर कहा कि उरला के थ्री डी फैक्ट्री में ब्लास्ट की घटना बेहद दुखद है। फैक्ट्री को तत्काल बंद कर दिया गया है। साथ ही घटना की जांच के आदेश भी दिए गए है। उन्होंने बताया कि मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख मुआवजे का प्रावधान किया गया हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसपर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि राजधानी के उरला थाना क्षेत्र स्थित बेंद्री की थ्रीडी इनोवेशन फैक्ट्री एक भीषण विस्फोट से दहल उठी। कथित तौर पर ऑक्सीजन सिलेंडर में हुए धमाके के बाद बॉयलर में भी विस्फोट हुआ, जिससे फैक्ट्री परिसर में काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। मंगलवार शाम करीब सात बजे धमाका इतना जोरदार था कि दो श्रमिकों के शव मौके पर ही क्षत-विक्षत हो गए, जबकि तीसरे मजदूर ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। श्रमिकों के मुताबिक शरीर के अंग 100-150 मीटर दूर तक जा गिरे। देर रात तक राहत और बचाव अभियान जारी रहा तथा पूरे इलाके को खाली कराकर सील कर दिया गया। इसके बाद उरला पुलिस जांच पड़ताल में जुड़ गई है।
उरला पुलिस के मुताबिक हादसे में मध्यप्रदेश के डिंडौरी निवासी कमल सिंह और लाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जांजगीर निवासी युवा श्रमिक अरुण पांडे ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। विस्फोट के कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस, फायर ब्रिगेड, 108 एंबुलेंस और बचाव दल देर रात तक सर्च ऑपरेशन में जुटे रहे। फैक्ट्री में कई श्रमिकों के लापता होने की भी आशंका जताई जा रही है।
सुरक्षा नियमों पर उठे सवाल
उरला औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। हादसों में श्रमिकों की मौत के बावजूद फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावी जांच नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। फैक्ट्री कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि परिसर में लंबे समय से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। कई श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण तक उपलब्ध नहीं कराए गए थे। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती तो इस तरह की गंभीर घटना को टाला जा सकता था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुरक्षा मानकों से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप, फैक्ट्री सील कर जांच में जुटी पुलिस
श्रमिक के मुताबिक हादसे के बाद जब अन्य कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उसके चलते कर्मचारी काफी दहशत में नजर आ रहे थे विस्फोट की चपेट में आए दो मजदूरों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शरीर के कई अंग विस्फोट स्थल से 100 से 200 मीटर दूर तक बिखरे पड़े थे। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी और आसपास के लोग भी सहम गए।
भाई की मौत, काम कर रहे मजदूर को पता चला बाद में
बताया जा रहा है कि हादसे में जान गंवाने वाले अरुण पांडे का भाई भी उसी फैक्ट्री में काम करता है। उसने बताया कि शाम करीब सात बजे वह फैक्ट्री परिसर में ही काम कर रहा था। अचानक तेज धमाका हुआ तो वह अन्य कर्मचारियों के साथ भागकर मौके पर पहुंचा। वहां पहुंचते ही उसने देखा कि कई श्रमिकों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत पड़े हैं। एक घायल को तत्काल अस्पताल भेजा गया। बाद में उसे पता चला कि हादसे में उसके भाई अरुण की भी मौत हो गई। उसने बताया कि अरुण कुछ वर्ष पहले ही नौकरी पर लगा था, जबकि वह स्वयं सात वर्षों से फैक्ट्री में कार्यरत है।
परिजनों ने प्रबंधन पर लगाए लापरवाही के आरोप
हादसे की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में श्रमिकों के परिजन फैक्ट्री परिसर पहुंच गए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। परिजनों का आरोप था कि घटना के काफी समय बाद तक कंपनी का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने फैक्ट्री परिसर को घेराबंदी कर सील कर दिया। तनावपूर्ण माहौल को नियंत्रित करने के लिए कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। रात करीब साढ़े नौ बजे तक मौके पर 100 से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस नेता पंकज शर्मा और इकराम अहमद सहित अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे और श्रमिकों व परिजनों से चर्चा कर घटना की जानकारी ली।
धमाके से मची अफरात 50 से अधिक कर्मचारी थे ड्यूटी पर
दो मजदूरों की मौके पर और तीसरे की अस्पताल ले जाते समय मौत हुई है। पूरे क्षेत्र को खाली कराकर फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।घटना के संबंध में कंपनी प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। मामले की प्रारंभिक जांच भी शुरू कर दी गई है।
– आकाश मरकाम, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त



