छत्तीसगढ़

आराध्य गरबा में गूंजा छत्तीसगढ़ी गौरव का स्वर, हजारों लोगों ने एक साथ गाया ‘अरपा पैरी के धार

पंडित राजेश शर्मा की पहल पर छत्तीसगढ़ महतारी का पूजन, ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ की दिखी झलक

आराध्य गरबा में गूंजा छत्तीसगढ़ी गौरव का स्वर, हजारों लोगों ने एक साथ गाया ‘अरपा पैरी के धार

 

 पंडित राजेश शर्मा की पहल पर छत्तीसगढ़ महतारी का पूजन, ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ की दिखी झलक

 

आज चौथे दिन ‘श्रीराम के दीवाने’ थीम में सजेगा आराध्य गरबा, भगवा रंग में नजर आएंगे गरबा प्रेमी; राष्ट्रीय कवयित्री अनामिका जैन अंबर की मौजूदगी बढ़ाएगी आयोजन की रौनक

 

धमतरी। आस्था, भक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता के रंगों से सराबोर आराध्य गरबा महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के साथ विभिन्न समाजों की सहभागिता भी देखने को मिल रही है। धर्मप्रेमी समाजसेवी एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पंडित राजेश शर्मा की पहल पर आयोजित इस महोत्सव में हजारों लोगों ने एक साथ छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत ‘अरपा पैरी के धार’ का सामूहिक गायन किया। हजारों कंठों से एक स्वर में गूंजते राजकीय गीत ने आयोजन स्थल को छत्तीसगढ़ की माटी, अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव के भाव से भर दिया।

 

मां दुर्गा की आराधना के साथ अपनी मातृभूमि की संस्कृति और पहचान को सम्मान देने की इस पहल ने आराध्य गरबा को विशेष स्वरूप प्रदान किया। छत्तीसगढ़ महतारी का पूजन, आकर्षक रंगों की थीम, पारंपरिक वेशभूषा और विभिन्न समाजों के वरिष्ठजनों की उपस्थिति ने आयोजन को सांस्कृतिक एकता का मंच बना दिया।

 

*छत्तीसगढ़ महतारी के पूजन के साथ संस्कृति का वंदन* 

आराध्य गरबा महोत्सव में छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र का विधिवत पूजन किया गया। आचार्य पंडित महेश शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। आयोजक पंडित राजेश शर्मा सहित आयोजन समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने छत्तीसगढ़ महतारी के समक्ष श्रद्धा अर्पित की।

 

इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता निभाते हुए प्रदेश की माटी, लोकसंस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मां दुर्गा की आराधना और छत्तीसगढ़ महतारी के पूजन के संगम ने महोत्सव को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक गौरव से भी जोड़ दिया।

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 *हरे रंग की थीम में बिखरी छटा, ‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ का संदेश** 

महोत्सव में हरे रंग की थीम के अनुरूप सजे गरबा प्रेमियों ने मनमोहक छटा बिखेरी। आकर्षक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा की धुनों पर नृत्य कर उत्साह और उमंग का वातावरण बनाया। आयोजन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया गया।

 

‘हमर धरोहर, हमर संस्कृति’ की भावना के साथ आयोजित इस महोत्सव ने संदेश दिया कि धार्मिक उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कारों और परंपराओं को सहेजने का अवसर भी हैं।

 

**सिंधी समाज के वरिष्ठजनों ने पहुंचकर बढ़ाया आयोजन का उत्साह, छत्तीसगढ़ी गीत व सिंधी गीतों में झूमे समाज जन* 

आराध्य गरबा महोत्सव में विभिन्न समाजों के वरिष्ठजनों की सहभागिता ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी। तीसरे दिवस पर पूज्य सिंधी समाज के अध्यक्ष चंदू जसवानी, रामचंद वाधवानी, अमर पिंजनी, राजा वाधवानी, अशोक डुंबनी सहित समाज के अन्य वरिष्ठजन आयोजन में पहुंचे। उन्होंने धमतरीवासियों के लिए इतने बड़े सांस्कृतिक आयोजन के आयोजन पर पंडित राजेश शर्मा को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

 

इस अवसर पर पंडित राजेश शर्मा ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। समाज के वरिष्ठजनों की उपस्थिति ने आयोजन में आपसी मेलजोल, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की भावना को और मजबूत किया।

 

*अंगवस्त्र और खुमरी पहनाकर पंडित राजेश शर्मा का अभिनंदन* 

छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए आयोजन समिति के सदस्यों ने आराध्य गरबा के आयोजक पंडित राजेश शर्मा को छत्तीसगढ़ी अंगवस्त्र और पारंपरिक खुमरी पहनाकर उनका अभिनंदन किया। पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से किया गया यह सम्मान प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता नजर आया।

 

*संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहें आने वाली पीढ़ियां : पंडित राजेश शर्मा*

 

आयोजक पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, संस्कार और परंपराएं हमारी पहचान और गौरव हैं। आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें, लोकपरंपराओं को समझें और उन पर गर्व करें, यही आराध्य गरबा के आयोजन की मूल भावना है।

 

उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा की आराधना का माध्यम है। इसके साथ ही यह समाज को जोड़ने, आपसी सद्भाव बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अवसर भी है। हमारी पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं।

 

पंडित शर्मा ने कहा कि हजारों लोगों द्वारा राजकीय गीत ‘अरपा पैरी के धार’ का सामूहिक गायन प्रदेश की अस्मिता, गौरव और सांस्कृतिक एकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है। आधुनिकता को अपनाना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों और संस्कारों को भूलकर नहीं। उत्सवों और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत सदैव जीवंत बनी रहे।

 

*चौथे दिन ‘श्रीराम के दीवाने’ थीम, भगवा रंग में रंगेगा आराध्य गरबा* 

 

आराध्य गरबा महोत्सव के चौथे दिन ‘श्रीराम के दीवाने’ थीम विशेष आकर्षण रहेगी। इस दिन की ड्रेस थीम भगवा रंग निर्धारित की गई है। भगवा परिधानों में सजे गरबा प्रेमी भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति का भाव प्रदर्शित करेंगे।

 

भगवा रंग की थीम के साथ गरबा के आंगन में भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का विशेष संगम देखने को मिलेगा। भगवान श्रीराम के प्रति आस्था और मां दुर्गा की आराधना से सजी यह सांस्कृतिक संध्या महोत्सव की रौनक को और बढ़ाएगी।

 

*राष्ट्रीय कवयित्री अनामिका जैन अंबर के साथ गरबा करेंगे धमतरीवासी* 

 

आराध्य गरबा महोत्सव के चौथे दिन राष्ट्रीय कवयित्री अनामिका जैन अंबर की उपस्थिति भी प्रमुख आकर्षण होगी। वे आराध्य गरबा के आंगन में धमतरीवासियों के साथ गरबा करेंगी। उनकी मौजूदगी को लेकर गरबा प्रेमियों और प्रतिभागियों में खासा उत्साह है।

 

‘श्रीराम के दीवाने’ थीम, भगवा परिधानों और राष्ट्रीय कवयित्री अनामिका जैन अंबर की उपस्थिति के साथ चौथे दिन भक्ति, काव्य और गरबा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

 

आराध्य गरबा महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति, भारतीय परंपराओं और सामाजिक समरसता को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास कर रहा है। विभिन्न समाजों के वरिष्ठजनों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि संस्कृति की असली खूबसूरती विविधताओं में एकता और आपसी सम्मान में निहित है।

Author Desk

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