छत्तीसगढ़

सीएसआर फंड में पक्षपात का लगाया आरोप, मंत्री वोले सीएसआर को लेकर कोई समिति नहीं

सीएसआर फंड में पक्षपात का लगाया आरोप, मंत्री वोले सीएसआर को लेकर कोई समिति नहीं

बजट सत्र के तीसरे दिन आज बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने सीएसआर फंड में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर मंत्री के जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब कलेक्टर को निर्देशित नहीं कर सकते तो मंत्री होने का क्या औचित्य है?

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने सीएसआर फंड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जांजगीर जिले में सीएसआर फंड में पारदर्शिता नहीं है। जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा का पालन नहीं हो रहा है। कलेक्टर अपनी मनमर्जी से राशि बाँट रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की समिति का कोई औचित्य नहीं है। शहर में ग्राम पंचायत बनाकर काम कैसे बांट दिया गया। कई काम अब तक शुरू हुई नहीं हुए। कई गांव का सूची में नाम ही नहीं है लेकिन सभी में काम बांट दिया गया है। क्या इसकी जांच होगी?

इस पर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि सीएसआर को लेकर कोई समिति नहीं है। सीएसआर फंड का उपयोग गाँवों में हो सकता है। आपकी ओर से भी दो प्रस्ताव है। उद्योग खुद भी काम दे सकते हैं और कलेक्टर भी अनुसंशा अनुरूप काम दिया जाता है। कलेक्टर द्वारा किए गए काम की जांच की जा सकती है। ग्राम पंचायत को भी काम दिया जा सकता है। क्षेत्र की विकास स्थिति को देख कर काम दिया जाता है।

इस पर कांग्रेस विधायक ने कहा कि मंत्री जी प्रस्तावों पर घोषणा कर दें। कलेक्टर को कार्यों के लिए निर्देशित कर दें। इस पर मंत्री ने कहा कि मुझे घोषणा का अधिकार नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब कलेक्टर को निर्देशित नहीं कर सकते तो मंत्री होने का क्या औचित्य है?

Author Desk

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