छत्तीसगढ़

शांति घाट में अंतिम संस्कार के लकड़ी हेतु रिक्शा सेवा, हजारों लोगों का बना सहारा

विजय और राजेंद्र को दिल से झकझोर ने वाली घटना ने किया स्वप्रेरित

धमतरी-शांति घाट में अपने परिजन के अंतिम संस्कार हेतु पहुंचने वाले लोगों को एक बड़ी परेशानी शव दाह संस्कार के लिए लकड़ी उस स्थल तक पहुंचाने की बड़ी एवं कठिन समस्या का सामने लोगों को करना पड़ता था, यही बात का मार्मिक एहसास निगम के एक कर्मचारी के अंतिम संस्कार में पहुंचे तत्कालीन समय में निगम के पाषर्द गण विजय मोटवानी एवं राजेंद्र शर्मा को हुआ तो दोनों की मानवीय संवेदनाएं, से हृदय को झकझोर देने वाली भावनाएं ने द्रवित कर दिया। क्योंकि अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों की संख्या काफी कम थी और बारिश भी दो तीन दिनों से मूसलाधार हो रही थी, जिससे अन्य वाहन की अनुपलब्धता के कारण लकड़ी को अंतिम संस्कार स्थल सेड तक पहुंचना एक कठिन काम था, और वहीं से किसी तरह अंतिम संस्कार करने के पश्चात वहीं से दोनों ने ही लकड़ी पहुंचाने हेतु कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था हमेशा के लिए करने की ठानते हुए शहर में खोजबीन करने निकल पड़े और दूसरे ही दिन शांति घाट में ले जाकर माल वाहक रिक्शा उपलब्ध कराया। इस कार्य में वर्तमान एवं तत्कालीन शांति घाट स्थल वार्ड के पार्षद अज्जू देश लहरे  भी एक कदम आगे बढ़ते हुए स्वयं यह जिम्मेदारी नहीं कि इस रिक्शा की देखभाल वे करेंगे। तब से लेकर आज तक यह रिक्शा हजारों लोगों के अंतिम संस्कार करने हेतु लकड़ी ढोने का एक माध्यम बनते हुए अतीत में अपने छोटी वास्तु के रूप में बहुत बड़ी स्मृतियों को समय हुआ होकर भले ही बात छोटी हो लेकिन बड़े रूप में समाज के लिए प्रेरणा स्रोत एवं मार्गदर्शक बनकर आज भी उपस्थित है।

Author Desk

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