मदर्स डे पर आदर्श स्कूल 1998 बैच का अनोखा आयोजन, गुरुजनों के सम्मान में झुके शिष्य

पुरानी यादें हुईं ताजा, स्कूल के दिनों को याद कर भावुक हुए पूर्व विद्यार्थी
धमतरी। मदर्स डे के अवसर पर धमतरी के आदर्श शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित आदर्श स्कूल के वर्ष 1998 बैच के पूर्व छात्र-छात्राओं ने ऐसा प्रेरणादायी आयोजन किया, जिसने गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल पेश कर दी। वर्षों बाद एक मंच पर जुटे पूर्व विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का सम्मान कर न केवल पुरानी स्मृतियों को जीवंत किया, बल्कि समाज के सामने संस्कार, सम्मान और कृतज्ञता का सुंदर उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
विद्यालय भले ही आज बंद हो चुका है, लेकिन यहां से प्राप्त शिक्षा, संस्कार और गुरुजनों का स्नेह आज भी विद्यार्थियों के हृदय में जीवित है। इसी भावना के साथ रविवार 10 मई को आयोजित सम्मान समारोह में पूर्व छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और अपने शिक्षकों को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कई विद्यार्थी अपने स्कूल के दिनों की पुरानी तस्वीरें और गुरुजनों की स्मृतियों को आज भी संभालकर रखने की बात कहते हुए भावुक नजर आए।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कहा कि माता-पिता के बाद यदि किसी का जीवन निर्माण में सबसे बड़ा योगदान होता है, तो वह गुरु का होता है। गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और जीवन की दिशा देते हैं। इसलिए मदर्स डे जैसे स्नेह और सम्मान के पर्व पर गुरुजनों का अभिनंदन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
अपने विद्यार्थियों से वर्षों बाद ऐसा सम्मान पाकर गुरुजन भी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भी यदि विद्यार्थी अपने शिक्षकों को याद रखकर सम्मान देते हैं, तो यह भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत पहचान है। यही संस्कार भारत को विश्व में विशिष्ट बनाते हैं।
कार्यक्रम में सम्मानित गुरुजनों में जगदीश सोनी, संध्या मिश्रा, फिरोजा मैडम, वसीमा अली मैडम, पुष्पा जाधव, अलका शर्मा, साधना केसरवानी, ममता गुप्ता, शारदा गुप्ता, राजेश तिवारी, स्वर्णि मैडम, हेमंत उर्फ बाबू सर, अर्चना तिवारी, सरोज रट्टाटे एवं अनिल केसरवानी शामिल रहे। सभी ने अपने पूर्व विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वहीं कार्यक्रम में शामिल पूर्व छात्र-छात्राओं में गोपाल कटारिया, तौशिफ अली, वैभव पवार, पीयूष रायपुरा, उत्तम साहू, हेमंत साहू, अभिमन तिवारी, विकास वाल्मीकि, अमित डोडवानी, राकेश रूपवानी, समीर पाण्डेय, कमल दीवान, संदीप बुरड़, बंटी राज वाधवानी, मुकेश दीवान, बंटी मोटवानी, भावेश हरबधिया, स्मृति शुक्ला, तस्लीम मुसानी, पूजा केशवानी, श्वेता गंभीर, प्रियंका चोपड़ा, स्वाति सिन्हा, नूतन सिन्हा, मौसिना विरानी, नीलम नागवानी, सोनिका लालवानी, नीलम बुधवानी, स्नेहा लालवानी सहित अनेक साथियों ने सहभागिता निभाई।
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन वेदप्रकाश साहू ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन गोपाल कटारिया द्वारा किया गया। आयोजन के अंत में सभी ने एक-दूसरे से फिर मिलते रहने और गुरुजनों के सान्निध्य को जीवनभर बनाए रखने का संकल्प लिया।
यह आयोजन केवल मिलन समारोह नहीं था, बल्कि संस्कार, सम्मान और रिश्तों की उस अमिट डोर का प्रतीक था, जो समय बीत जाने के बाद भी कभी कमजोर नहीं होती।



