मातृ दिवस विशेष: 102 बच्चों की मां बनकर उनकी जिंदगी संवार रही हैं सरिता दोशी

धमतरी (प्रखर) मातृत्व केवल जन्म देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि सच्चा मातृत्व वह है जो दूसरों के जीवन को संवारने का संकल्प ले। धमतरी की सरिता दोशी इसका जीवंत उदाहरण हैं, जो पिछले कई वर्षों से 102 बच्चों के जीवन में मां बनकर उनके सपनों को नई उड़ान दे रही हैं।
समाज में कई ऐसे बच्चे होते हैं जो दिव्यांगता, मानसिक कमजोरी या आर्थिक तंगी के कारण सामान्य जीवन से पीछे रह जाते हैं। ऐसे बच्चों को समाज में अक्सर वह अपनापन और अवसर नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार होते हैं। सरिता दोशी ने ऐसे ही बच्चों को अपने स्नेह और ममता से अपनाया और उनके जीवन में नई रोशनी भरने का बीड़ा उठाया।
सरिता दोशी के प्रयासों से दिव्यांग और मानसिक रूप से विशेष 70 बच्चों को मां का स्नेह मिल रहा है। संस्था के माध्यम से इन बच्चों को शिक्षा, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तैयार किया जा रहा है। वहीं 31 गरीब और होनहार बेटियों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी उन्होंने अपने कंधों पर उठाई है।
आर्थिक तंगी के कारण जहां कई बेटियां पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं, वहीं सरिता दोशी इन बेटियों के लिए एक सच्ची मां बनकर उनकी शिक्षा का पूरा खर्च उठा रही हैं। वे सिर्फ पढ़ाई के लिए प्रेरित ही नहीं करतीं बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी और सक्षम बनाने के लिए भी लगातार प्रयास करती हैं।
उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि उनकी देखरेख में पढ़ने वाली चार बेटियां आज सरकारी नौकरी में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह उपलब्धि केवल उन बेटियों की सफलता नहीं बल्कि सरिता दोशी के वर्षों के त्याग, संघर्ष और ममता का परिणाम है।
सरिता दोशी का कहना है कि समाज में ऐसे कई बच्चे और बेटियां हैं जिनके सपने केवल आर्थिक अभाव के कारण अधूरे रह जाते हैं। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और सहारा मिल जाए तो वे भी जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
मातृ दिवस के अवसर पर सरिता दोशी का यह समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने साबित कर दिया कि मां वही नहीं होती जो जन्म देती है, बल्कि वह भी मां होती है जो किसी के जीवन में आशा, सहारा और आगे बढ़ने का हौसला बनती है। आज 102 बच्चों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरने वाली सरिता दोशी वास्तव में मातृत्व की सच्ची मिसाल बन चुकी हैं।



