छत्तीसगढ़

18 साल पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में 7 आरोपियों को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत

धमतरी के मगरलोड में 2007 की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप

सशर्त राहत देते हुए कोर्ट ने दिए जांच में सहयोग के निर्देश

बिलासपुर। धमतरी जिले की वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े 18 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट ने सात आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि इसी मामले में समान आरोपों वाले अन्य सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी जमानत का लाभ दिया जाना उचित है। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने सात अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है।

क्या है मामला?
वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 172 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। आरोप है कि चयन समिति के सदस्यों और अन्य आरोपियों ने आपसी साजिश कर कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के आधार पर उनके अंक बढ़ाकर चयन करा दिया। इसके कारण पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी। इस मामले में वर्ष 2011 में थाना मगरलोड में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

याचिकाकर्ताओं की दलील
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत कई चरणों की जांच और स्क्रीनिंग के बाद पूरी की गई थी। करीब 5 हजार आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी जांच के बाद अंतिम चयन सूची तैयार की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस की जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता किसी आपराधिक षड्यंत्र में शामिल थे। साथ ही यह भी बताया गया कि इसी मामले के अन्य आरोपियों को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

50-50 हजार रुपये के मुचलके पर राहत
हाईकोर्ट ने सातों आरोपियों को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि आरोपियों की गिरफ्तारी होती है तो उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानतदार पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने आरोपियों को जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, ट्रायल के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहने और भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं होने की शर्त भी लगाई है। इसके अलावा सभी आरोपियों को 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर राज्य सरकार या शिकायतकर्ता जमानत निरस्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

Author Desk

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