
पीपलकोटी/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी इलाके में गुरुवार शाम निर्माणाधीन डीआरटी टनल में अचानक मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 18 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। मृतकों में छत्तीसगढ़ और झारखंड के मजदूर शामिल हैं। बाकी लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हादसा गुरुवार शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच एचसीसी की साइट पर हुआ। हाइड्रो प्रोजेक्ट की करीब 3.5 किलोमीटर लंबी टनल में गेट से लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा बाहर आ गया। उस समय टनल के भीतर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने टनल साइट का जायजा लिया। इसके बाद वे घायलों का हालचाल जानने के लिए हेली से जिला अस्पताल गोपेश्वर रवाना हुए। प्रशासन की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन की लगातार निगरानी की जा रही है।
अचानक भर गया मलबा-पानी
बताया जा रहा है कि कैविटी से मलबा और पानी आने के दौरान टनल के अंदर जोरदार धमाका हुआ। देखते ही देखते पानी और मलबे का तेज बहाव सुरंग के भीतर फैल गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मजदूरों में अफरातफरी मच गई। कई मजदूर बहाव के साथ टनल के बाहरी हिस्से की ओर आने लगे, जबकि कुछ मलबे में फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में टनल के अंदर 22 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई थी। इनमें से 18 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है।
रात में रोका गया था रेस्क्यू
टनल के अंदर लगातार मलबा जमा होने के कारण रात में रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। इसके बाद बचाव दल ने दोबारा अभियान शुरू किया। टीमें मलबा हटाकर बाकी लोगों की तलाश में जुटी हैं। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
हादसे में घायल छत्तीसगढ़ निवासी सुनील दीवान ने जिला अस्पताल में मीडिया को बताया कि वे टनल के अंदर सरिया से सेटरिंग बना रहे थे। एक साथ वे करीब 17 लोग थे। अचानक करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ और मलबा, पानी व पत्थर तेज गति से टनल के अंदर घुस आए। इसके धक्के से कई लोग दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे में दब गए। हम मलबे के धक्के से टनल के बाहर की ओर आ गए। मजदूर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। टनल में कई जगह से मलबा आने से ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। कुछ लोग दम घुटने के कारण मलबे में आगे चल नहीं पा रहे थे। शुक्र है समय पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया।
पिछले साल इसी परियोजना में हुआ था लोको ट्रेन हादसा
टीएचडीसी की इसी निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजना में पिछले साल 31 दिसंबर की देर रात सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं। हादसे में करीब 60 अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे। हादसे के समय सुरंग में 100 से अधिक लोग काम कर रहे थे। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्घटना के बाद सुरंग में लंबे समय तक निर्माण कार्य रोक दिया गया था।



