दादाबाड़ी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण कल्याणक

रायपुर। दादाबाड़ी में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ परम पूज्य नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा आदि ठाणा – 04 के पावन निश्रा में भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक मनाया गया। साध्वीजी ने नवकार दरबार में बैठे सभी श्रावक-श्राविकाओं को सम्मेद शिखरजी का भाव यात्रा के माध्यम से दर्शन कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आप घर बैठ कर शुद्ध और पवित्र भाव के साथ भगवान के दर्शन-वंदन और पूजन की निर्जरा कर सकते हैं। जो आज तक सम्मेद शिखर नहीं गए है, वे अपनी आंखें बंद कर उनके दर्शन का लाभ ले सकते है। प्रभु के चित्रण-मनन मात्र से ही हम उनके दर्शन कर अपने मन को आनंदित कर सकते है।
साध्वी जी कहती है कि आंखें बंद करने के दौरान ऐसा सुंदर नजारा हमारे मन में आना चाहिए जैसे कि गुरू प्रसन्न मुद्रा में बैठे है। परमात्मा के मिलन का भाव अगर मन में हो तो आप हजारों किलोमीटर तक पैदल चल कर जा सकते है। सम्मेद शिखर पर तो हमें केवल 27 किलोमीटर पैदल पहाड़ी चढ़नी है। वैसे ही भी इस पर्वत पर चढ़ने वाले कभी नहीं थकते क्योंकि प्रभु के दर्शन की इच्छा लेकर चलने वाले बहुत तेजी से आगे बढ़ते है। 20 तीर्थंकर इस पर्वत से मोक्ष में गए, इससे पावन और पवित्र जगह कोई नहीं है।
साध्वीजी ने बताया कि सम्मेद शिखर की लीला अपरंपार है। देवताओं के विमान भी भगवान का निर्वाण कल्याणक मनाने उतर रहे थे। ठंडी-ठंडी हवाएं चल रही थी और अब सम्मेद शिखर के बारे में वर्णन करने के लिए हमारे मुख में शब्द ही नहीं आ रहे थे। परमात्मा की भक्ति में हम ऐसे लीन हो चुके है कि हम अब 20 तीर्थंकरों की कल्याण भूमि पर उनके दर्शन कर अपने जीवन को पवित्र कर रहे है। अब परमात्मा और आपके बीच कोई नहीं, सीधे उनके साथ आपका संवाद हो रहा है। आप कह रहे है कि हे प्रभु बचपन में आप मेरे साथ खेल रहे थे और फिर न जाने आप कहां चले गए। आप स्वार्थी निकले, आपने परम पद की प्राप्ति कर ली और मुझे इस संसार में छोड़कर चले गए। अब इंतजार है कि आप मुझे अपने पास कब बुलाओगे। अब इसके बाद आप पूजन-अनुष्ठान कर अपने जीवन को धन्य कर लिया।



