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धान खरीदी पर भारतीय जनता पार्टी झूठ बोल रही, इसमें केंद्र का योगदान शून्य : सुशील आनंद शुक्ला

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार का धान खरीदी में कोई योगदान नहीं है। धान खरीदी का पूरा का पूरा पैसा राज्य सरकार के द्वारा वहन किया जाता है। राज्य सरकार मार्कफेंड के माध्यम से विभिन्न बैंको से कर्ज लेकर धान खरीदी करती है। किसानों को छत्तीसगढ़ में 2640 रूपये, देश ही नही दुनिया में सबसे ज्यादा कीमत भूपेश सरकार दे रही है। भारतीय जनता पार्टी नेता भ्रम फैलाने के लिये जबरिया वाहवाही लेने के लिये राजनीति कर रहे है। पिछले वर्ष 107 लाख मीट्रिक धान की खरीदी कांग्रेस सरकार ने किया था। यह एक बड़ी उपलब्धि है। 15 साल में रमन सरकार के द्वारा इसका आधा धान ही खरीदा जाता था। इस वर्ष 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ को मिलने वाली केंद्रीय सहायता पर ऐसा बयान देते है जैसे छत्तीसगढ़ की जनता पर मोदी सरकार कोई अहसान कर रही है। संघीय ढांचे में यह राज्य का अधिकार है। केंद्र छत्तीसगढ़ से जीएसटी वसूलता है। कोयला, आयरन ओर, बॉक्साईट जैसे खनिजों का उत्खनन करता है। छत्तीसगढ़ देश का सबसे बड़ा विद्युत उत्पादक है। राज्य को मिलने वाली सहायता छत्तीसगढ़ का अधिकार है खैरात नहीं, भाजपा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ मत करें।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र का राज्यों से चावल और अन्य अनाज खरीदना और राज्य का अपने किसानों से धान खरीदना दोनों अलग-अलग योजना है। राज्य अपने किसानों को उसकी उपज की पूरी कीमत देने अपने संसाधनों से धान की खरीदी करती है। छत्तीसगढ़ के किसानों से भूपेश सरकार ने 2660 रू. में धान खरीदा है। भाजपा शासित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि ने तो किसानों को 1000-1200 में धान बेचना पड़ता है। केंद्र सरकार अपनी कल्याण योजनाओं के लिये सस्ते दर पर चावल, गेहूं आदि दुकानों के माध्यम से बांटने के लिये राज्यों से खरीदती है। छत्तीसगढ़ से चावल खरीद कर मोदी सरकार राज्य पर कोई अहसान नहीं करता यह उसकी मजबूरी है।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र को कल्याण योजनाओं के लिये चावल बिना छत्तीसगढ़ का चावल खरीदे संभव नहीं है। छत्तीसगढ़ सरकार यदि 86 लाख टन केंद्र को चावल न दे तो केंद्र सरकार के पास बांटने के लिये चावल का संकट पैदा हो जायेगा। मोदी सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में चावल का भंडार नहीं है। कर्नाटका ने जब अपनी अन्नभाग्य योजना के केंद्र से 35 लाख मीट्रिक टन चावल मांगा तो केंद्र ने मना कर दिया था।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि धान खरीदी में सहयोग तो दूर की बात है मोदी सरकार धान खरीदी में अडंगेबाजी करती है। भूपेश सरकार ने जब घोषित समर्थन मूल्य से ज्यादा 2500 रू. धान की कीमत का भुगतान किया तो मोदी सरकार ने सेंट्रल पुल के चावल लेने से मना कर दिया था। तब केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण कांग्रेस सरकार को राजीव गांधी किसान न्याय योजना चालू कर किसानों को 9000 प्रति एकड़ एवं 10,000 प्रति एकड़ की इनपुट सब्सिडी दी जा रही है।

Author Desk

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