सुर्य उपासना का पर्व है मकरसंक्रांति, मकरसंक्रांति का पर्व 15 जनवरी को
धमतरी -विप्र विद्वत परिषद धमतरी ने बताया कि सनातन धर्म में मकर संक्रान्ति का विशेष महत्व है।सुर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकरसंक्रांति है इस दिन से सुर्य उतरायण हो जाता है। उतरायण देवताओं का दिन कहलाता है। सुर्य का उतरायण होने पर दिन बड़ा हो जाता है एवं रात्रि छोटे हो जाते हैं। मकरसंक्रांति के पर्व को आदिकाल से सुर्य उपासना के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष देव पंचाग के अनुसार 14 जनवरी को रात्रि 2 बजकर 44 मिनट पर सुर्य का उतरायण होंगा एवं 15 जनवरी को सुर्य उदिया शतभिषा नक्षत्र है इस कारण मकरसंक्रांति का पर्व मनाया जायेगा ।जिसका पुण्य काल पुरे दिन रहेगा इस दिन का विशेष महत्व तीर्थस्नान जाप हवन पुजन एंव दान कांस्य पात्र में तिलों का त्रिकोण बनाकर कम्बल वस्त्रादि गौ स्वर्ण सहित दान करने का महत्व है। इस वर्ष मकरसंक्रांति का आगमन वृद्ध के रुप में हल्दी लेप किये एंव अश्व ( घोड़ा) का सवार , उपवाहन सिंह, कृष्ण वस्त्र एवं विप्र जाति ,स्वर्ण भूषण, कमल पुष्प ,नीलकंचुकी ,वृद्ध अवस्था बैठी स्थिति में आगमन होगा ।
परिषद के मिडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि संक्रांति पर्व से सभी देव कर्म प्रारंभ हो होते हैं एंव इस दिन से खरमास समाप्त हो जाता है । इसी कारण महाभारत काल में भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु प्राप्ति के लिए सुर्य उतरायण की प्रतीक्षा करते रहे सुर्य की उतरायण होने पर उन्होंने ने अपने शरीर का त्याग किया ।संक्रांति के दिन खिचड़ी के अलावा तिल का विशेष महत्व है इस दिन तिल के लड्डू एवं तिल का उपयोग हवन तर्पण एवं खाने के लिए और दान के लिए किया जाता है ऐसी मान्यता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु जी के शरीर से हुई है। इसलिए मोक्ष प्राप्ति में इसका विशेष महत्व है उपरोक्त जानकारी परिषद के मिडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने दी।




