पंडवानी की अमर आवाज़ हुई मौन: पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, लोककला जगत में शोक की लहर

पंडवानी की अमर आवाज़ हुई मौन: पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, लोककला जगत में शोक की लहर
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और रायपुर स्थित एम्स में उनका उपचार चल रहा था। रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की उस परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जिसे कभी सीमित दायरे की लोककला माना जाता था। उन्होंने अपनी बुलंद आवाज़, सशक्त अभिनय, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और अनूठी प्रस्तुति शैली से महाभारत की कथाओं को इस तरह जीवंत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनकी प्रस्तुतियां केवल गायन तक सीमित नहीं रहती थीं, बल्कि अभिनय, संवाद और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से महाभारत के पात्रों को सजीव कर देती थीं।
डॉ. तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एशिया, यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर भारतीय लोक परंपरा का परचम लहराया। उनकी कला के माध्यम से दुनिया ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को करीब से जाना और सराहा।
भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. (डॉक्टर ऑफ लेटर्स) की उपाधि प्रदान कर उनके योगदान का सम्मान किया।
डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, समर्पण और साधना का अद्भुत उदाहरण रहा। उन्होंने लोककला को केवल जीवित ही नहीं रखा, बल्कि उसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनके निधन से भारतीय लोकसंगीत और रंगमंच ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी है। हालांकि उनकी आवाज़, उनकी कला और पंडवानी की अनूठी शैली आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।



