देवशयनी एकादशी के साथ जप-तप-साधना, पूजा-आराधना का चातुर्मास शुरु जैन मुनिगणों का शहर में मंगल प्रवेश
सर्व गुजराती समाज प्रदेशाध्यक्ष प्रीतेश गांधी, नगर निगम के पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा ने मुनिगणों से आशिर्वाद प्राप्त कर किया


धमतरी (प्रखर) देवशयनी एकादशी के साथ ही आज से देवताओं का सुसुप्ता अवस्था मे चले जाने का पुरातनकालीन मान्यता चली आ रही है जिसे चतुर्मास के रूप में तप, जप, आराधना साधना एवं पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ महीने के रूप में शास्त्रों में भी उल्लेख मिलता है इस चार माह में साधु संत ऋषि मुनि एक जगह रहकर धार्मिक क्रियाओं में लीन होते हैं तथा विहार ना करते हुए एक जगह निवासरत होते हैं उक्त महीने का जैन समाज में विशेष महत्व है जिसके अंतर्गत चातुर्मास हेतु शहर में श्री महेंद्र सागर जी म.सा. के शिष्य मुनिगण परम पूज्य श्री विशुद्ध सागर जी म.सा., परम पूज्य श्री पुण्यवर्धन सागर जी म.सा., परम पूज्य श्री जीत वर्धन सागर जी म.सा.का आज सुबह मंगल प्रवेश सिहावा चौक से भजन कीर्तन के साथ हर्षोउल्लास पूर्वक हुआ जो शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए इतवारी बाजार स्थित मंदिर पहुंची जिनका रास्ते पर जगह-जगह स्वागत किया गया।



