पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ किया प्रम्बानन मंदिर का दौरा

भारत देगा मंदिर संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना में सहयोग, मोदी बोले- 2029 से पहले पूरा होगा काम
योग्याकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। यह मंदिर परिसर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। दोनों नेताओं ने मंदिर जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का शुभारंभ भी किया। भारत और इंडोनेशिया के बीच एक दिन पहले इस ऐतिहासिक धरोहर स्थल के संरक्षण एवं पुनर्निर्माण को लेकर समझौता हुआ था। इस परियोजना में भारत सहयोग प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनकी यात्रा में इंडोनेशिया के अलावा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। इंडोनेशिया में निर्धारित कार्यक्रम पूरे करने के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सुबिआंतो विमान से योग्याकार्ता पहुंचे, जहां दोनों ने प्रम्बानन मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता से प्रम्बानन मंदिर जा रहे हैं। उन्होंने दोनों नेताओं की विमान में हाथ मिलाते हुए तस्वीर भी साझा की।
भारत का सहयोग, 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
प्रम्बानन मंदिर जीर्णोद्धार परियोजना के शुभारंभ के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस गौरवशाली स्थल के संरक्षण कार्य का हिस्सा बनना भारत के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो ने वर्ष 2029 से पहले इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है और उन्हें पूरा विश्वास है कि यह कार्य समय पर पूरा होगा। पीएम मोदी ने कहा कि वह भविष्य में फिर इंडोनेशिया आकर इस ऐतिहासिक परियोजना की सफलता का जश्न राष्ट्रपति सुबिआंतो के साथ मनाएंगे।
शिव को समर्पित है प्रम्बानन मंदिर
योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। 10वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा को समर्पित मंदिर भी मौजूद हैं। यूनेस्को के अनुसार, मंदिर की दीवारों पर रामायण से जुड़े प्रसंगों की नक्काशी की गई है। यह परिसर हिंदू स्थापत्य कला और भारत-इंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।


