छत्तीसगढ़

तेज गर्मी से तालाब में घटी ऑक्सीजन, शीतला तालाब में हजारों मछलियों की मौत


धमतरी। अंचल में इन दिनों गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान का प्रभाव सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों और जलीय जीवों पर भी देखने को मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण शहर के महिमा सागर वार्ड स्थित शीतला तालाब में देखने को मिला, जहां बुधवार सुबह हजारों मछलियां मृत अवस्था में तालाब में तैरती हुई दिखाई दीं। अचानक इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत से क्षेत्र के लोग हैरान रह गए।
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह जब स्थानीय लोग शीतला तालाब के पास पहुंचे तो उन्होंने तालाब के किनारे और पानी की सतह पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां देखीं। कुछ ही समय में मछलियों के सड़ने से तेज दुर्गंध फैलने लगी, जिससे आसपास के वार्डवासियों को काफी परेशानी होने लगी। लोगों ने तत्काल इसकी जानकारी वार्ड पार्षद और तालाब की देखरेख कर रहे संबंधित ठेकेदार को दी।
सूचना मिलने के बाद पार्षद दीपक सोनकर मौके पर पहुंचे और तत्काल सफाई कार्य शुरू करवाया। सफाई कर्मचारियों और ठेकेदार की टीम ने तालाब में उतरकर मरी हुई मछलियों को बाहर निकालना शुरू किया। सैकड़ों की संख्या में मछलियों को निकालकर सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया, ताकि आसपास के लोगों को बदबू और संक्रमण की समस्या न हो। बताया गया कि दोपहर तक लगभग पूरे तालाब की सफाई कर ली गई थी।
पार्षद दीपक सोनकर ने बताया कि तेज गर्मी के कारण तालाब के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाने से मछलियों की मौत होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि मछली पालन कर रहे ठेकेदार को भी इस संबंध में सूचना दे दी गई थी और वह भी मौके पर पहुंचकर सफाई कार्य में जुट गया था। वार्डवासियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए लगातार निगरानी रखी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में तालाबों और जलाशयों में मछलियों के मरने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। इसका मुख्य कारण पानी के तापमान में वृद्धि और ऑक्सीजन की कमी होता है। जैसे-जैसे पानी का तापमान बढ़ता है, उसमें घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है। ठंडे पानी में ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में घुली रहती है, जबकि गर्म पानी में इसकी मात्रा काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा गर्मी के मौसम में मछलियों का मेटाबॉलिज्म भी तेज हो जाता है, जिसके कारण उन्हें सामान्य से अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वहीं तालाबों में शैवाल (एल्गी) की वृद्धि भी तेजी से होने लगती है। दिन के समय शैवाल प्रकाश संश्लेषण के जरिए ऑक्सीजन बनाते हैं, लेकिन रात के समय यही शैवाल ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी और बढ़ जाती है।

Author Desk

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button